67:33 की विजयश्री के साथ जयश्री का प्रश्न

श्री मोहन सिहाग जी आपको और सभी पदाधिकारियों को 67:33  पदोन्नति अनुपात पर  अपनी सफलता की कोटिशः बधाई। ����������मुझे राजस्थान  के  कई जिलों से महिला व्याख्या ताओ के सन्देश प्राप्त हुए हैं जिसमें महिलाएं जैसा कि उन्हें ज्ञात हुआ हैं समाचार पत्र  और अन्य संचार माध्यमों के जरिए । कि इस बार हो ने वाली डीपीसी में पुरूषों व्याख्याता मार्च 1994 वाले भी पदोन्नत हो सकेगें किन्तु 1990-1991 कि बमुश्किल ,100 महिला व्याख्याता            पदोन्नत हो सकेगी। आगे आने वाले समय में ओर खराब स्थिति का सामना  उन्हें करना हो गा। जैसे इनकी बढ़तीं संख्या, पदोन्नति के लिए बहुत कम पद। पदोन्नत हो ने वाली महिलाओं की सेवा निवृत्ति का फी समय की सेवा पश्चात हो ने से रिक्त पद उपलब्ध न  हो ना । और हो सकता कि महिला व्याख्या ता के पद से बिना कोई पदोन्नति प्राप्त किये महिला व्याख्याता सेवानिवृत्त हो जायें। अथवा जिले में पद रिक्त न मिलने पर अयन्त्र पोस्टिंग देना या कहीं तो बहुत सी पदोन्नति योग्य महिलाएं हो ना और पद कम होना और कहीं इसके विपरीत अधिककम महिलाएं अधिक पद जैसी विसंगति  पैदा होगी। हमारे शिक्षा मंत्री जी ने तो हमें अपना हक देकर न्याय किया। अब रेसला के भाई 67% के अपने हिस्से में अपनी बहिनों का हिस्सा  उन्हें देकर अपनी सह्रदय ता का परिचय देकर तमाम जनो में मिसाल कायम करते है। या आन्दोलन में कन्धे से कन्धा मिला कर साथ चलने वाली व्याख्याता बहनों को बीच मझधार में छोड कर अपना हित चिन्तन करेगें। यही देखने वाली बात हो गी और महिला व्याख्या ताओं को एक सबक भी फिर कभी कोई बहिन अपने भाईयों पर शायद ही रेसला के इतिहास मे भरोसा करें गी। मैं सभी रेसला के भाईयों से अपील करती हूँ ,कि लैंगिक भेदभाव पर आधारित इस नियम को समाप्त करने में अब तक किये गये अन्य प्रया सों की भाँति सी मुस्तैदी दिखाकर बहनों को उनका न्यायोचित हक दिलवाये। --प्रार्थी आपकी हक की लड़ाई में आपके साथ हर कदम पर  आपके                  संधर्ष  मे प्रति पल         साक्षी रही बहन।  ����हमेंे           आपके प्रत्युत्तर की प्रतिक्षा रहेंगी ।।ं

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Resla Raj

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