आइए इस पर चर्चा करें। अपने सुझाव अवश्य दें***

***साथीगण,  वर्तमान में मेरी नजर में हमारा ज्ञापन यह होना चाहिए। कोई भी सत्य कभी भी अंतिम सत्य नहीं होता है। अतः इसमें भी और सुधार संभव है। आइए इस पर चर्चा करें। अपने सुझाव अवश्य दें***

परम् सम्मानीय मुख्यमंत्री महोदय,
राजस्थान सरकार, जयपुर (राज.)

विषय:- स्कूली प्राध्यापकों की वेतन विसंगति दूर करने और प्रधानाचार्य पद पर प्राध्यापक व प्रधानाध्यापक (मा.वि.) की संस्थाई नियुक्ति तिथि से कॉमन सीनियरटी बनाकर पदोन्नति करने हेतु।

मान्यवर,

उपर्युक्त विषयांतर्गत यह संगठन विनम्रतापूर्वक निम्नांकित बिंदुओं के तहत अपने सदस्य प्राध्यापकों के साथ हुए अन्याय के संबंध में निवेदन करता है तथा आपसे न्यायोचित माँगे के निराकरण हेतु अनुरोध करता है-

1. वेतनमान विसंगति के संबंध में-

(अ) पाँचवे वेतन आयोग में स्कूली प्राध्यापक तथा प्रधानाध्यापक (मा.वि.) का वेतनमान 1.7.98 से पूर्व तक एकसमान 6500-10500 था किंतु प्रधानाध्यापक (मावि) के संगठन "राजस्थान शिक्षा सेवा परिषद् (रेसा)" ने भाभड़ा समिति के समक्ष यह गलत तथ्य प्रस्तुत किया कि प्रधानाध्यापक (मावि) का केन्द्र सरकार में वेतनमान 7500-12000 है जबकि सच्चाई यह है कि केन्द्र सरकार में प्रधानाध्यापक (मावि) का पद न तो उस समय अस्तित्व में था, न ही अभी अस्तित्व में है तथा केन्द्र सरकार में पाँचवे वेतन आयोग में यह वेतनमान (7500-12000) उपप्रधानाचार्य के लिए स्वीकृत किया गया था जो राजस्थान के प्राध्यापक तथा प्रधानाध्यापक (मावि) दोनों से एक स्टेज उच्च का पद है। (प्रमाणस्वरूप रेसा द्वारा भाभड़ा समिति को दिए गए पत्र की प्रति तथा केन्द्रीय विद्यालय संगठन से प्राप्त पत्रों की प्रति संलग्न है, जिनकी तुलना से सिद्ध हो जाता है कि समिति को रेसा ने गलत जानकारी देकर गुमराह किया था)

अतः स्पष्ट है कि किस प्रकार रेसा ने झूठे तथ्य प्रस्तुत कर प्रधानाध्यापक (मावि) का वेतनमान प्राध्यापक से उच्च 7500-12000 करवा लिया था।

(ब) इसके अलावा प्राध्यापकों को प्रधानाध्यापक (मा.वि.) के समकक्ष वेतनमान देने के लिए रेसला के वाद संख्या 2974/98 के तहत राजस्थान उच्च न्यायालय के निर्णय दिनांक 25.10.2005 में दिए गए आदेश की अनुपालना में राज्य सरकार द्वारा गठित जैन समिति के समक्ष भी रेसा ने इसी प्रकार के गलत तथ्य प्रस्तुत गुमराह किया जिससे उक्त समिति का निर्णय प्रभावित हुआ तथा प्राध्यापकों का वेतनमान संशोधित नहीं हो पाया। (प्रमाणस्वरूप अशोक जैन समिति की रिपोर्ट की प्रति, रेसा द्वारा दिए गए पत्र की प्रति तथा केन्द्रीय विद्यालय संगठन के पत्र की प्रति संलग्न है जो सिद्ध करते हैं कि रेसा ने गलत तथ्य प्रस्तुत किए थे)

(स) श्रीमान, रेसा ने कर्मचारियों की वेतन विसंगतियां दूर करने के लिए गठित कृष्णा भटनागर समिति के समक्ष पुराने झूठ के सहारे पैदा की गई परिस्थितियों को प्रमाण स्वरूप प्रस्तुत कर प्राध्यापकों की ग्रेड पे केन्द्र के अनुरूप नहीं होने देने की परिस्थितियाँ उत्पन्न की, जबकि राज्य में कार्यरत प्राध्यापक स्कूल शिक्षा के समकक्ष केन्द्र सरकार के पीजीटी के लिए ग्रेड पे 4800 है।

अतः श्रीमान से निवेदन है कि उक्त तथ्यों के आधार पर स्कूली प्राध्यापकों का वेतनमान जुलाई 1998 से संशोधित कर 7500-12000 करने तथा तद्नुरूप छठे वेतन आयोग में प्राध्यापकों का प्रारंभिक ग्रेड पे 5400 स्वीकृत करने का कष्ट करें।

2. प्रधानाचार्य पद पर प्राध्यापक व प्रधानाध्यापक (मा.वि.) की संस्थाई नियुक्ति तिथि से कॉमन सीनियरटी बनाकर पदोन्नति हेतु-

माननीय, राजस्थान शिक्षा सेवा नियम- 1970 के शिड्यूल 1 व 2 के ग्रुप- D-II में वर्णित प्रधानाचार्य, उच्च माध्यमिक विद्यालय के पद पर पदोन्नति हेतु वहाँ दी गई सारणी के कॉलम संख्या 5 में ग्रुप E तथा F के पदों को पात्र माना गया है तथा राजस्थान शिक्षा सेवा नियम 1970 के नियम 28 उपनियम 7 के अनुसार यह पदोन्नति ग्रुप E तथा ग्रुप F में कार्यरत अधिकारियों की संस्थाई नियुक्ति तिथि से कॉमन वरिष्ठता सूची के आधार पर करने का प्रावधान है। चूँकि वर्तमान में ग्रुप E के पदों यथा- वरिष्ठ उप जिला शिक्षा अधिकारी व समकक्ष को अपग्रेड करके प्रधानाचार्य के समकक्ष कर दिया गया है, अतः ग्रुप E का अस्तित्व समाप्त हो चुका है। ग्रुप E समाप्त हो जाने से अब उक्त नियम 28(7) के अनुसार प्रधानाचार्य पद पर पदोन्नति ग्रुप F (प्राध्यापक व प्रधानाध्यापक, मा.वि.) की संस्थाई नियुक्ति तिथि से कॉमन वरिष्ठता के आधार पर करनी चाहिए।

विनीत,
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Resla Raj

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1 comments:

  1. इसे मुख्यमंत्री जी के ब्लॉग पर भी पोस्ट करने का श्रम करे।

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