सम्मानित साथियों,
                               आज राष्ट्रीय मतदाता दिवस है साथ ही साथ आज राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या भी है. हम सब के मन में संदेह पूर्ण विचार चक्कर लगा रहा  है कि हमारी प्रमुख मांगों का क्या हुआ , क्या कोई घोषणा मुख्य मंत्री द्वारा कि जाएगी? हमारा क्या होगा, हमारे संगठन के अग्रणी लोग क्या कर रहे हैं ? इन बड़े और सबसे जुड़े प्रश्नों के अलावा  हमारी कार्यस्थल की कई व्यक्तिगत समस्याएं भी है. ऐसे माहोल में आवश्यकता है जागने की और जुड़ने की . साथियों, यह ब्लॉग एक विनम्र प्रयास है सभी व्याख्याता साथियों को एक मंच पर लाने का, क्योंकि आज हमारे सामने सबसे बड़ा शून्य यही है की इस ज़माने में जहाँ संवाद के इतने माध्यम है , हम समाज को जोड़ने की शिक्षा देने वाले हैं, उस ज़माने में हम आपस में दूर है, एक दूसरे तक पहुँच नहीं है, अपने अधिकारों का न तो ज्ञान है , न ही उसके लिए लड़ने की इच्छा है. साथियों एक बात हमेशा याद रखें, हमारी लड़ाई कोई दूसरा कभी नहीं लडेगा, ये हमें अपने आप ही लड़नी पड़ेगी. रोज भाषण या नीति में एकता की बात तो हम बच्चों को  हम बताते है पर खुद एक नहीं है, ओरों को तो जागते है पर खुद सोये हुए है,  समाज तो हमें प्रकाश देने वाला दीपक मानता है, पर बड़े अफ़सोस की बात है कि आज उसी दीपक तले अँधेरा है. जरुरत है स्वयं प्रकाशित होने की,

                                                        ब्लॉग पर आयें, अपनी ई मेल आई डी से जुड़े , अपने कार्य स्थल का पूरा विवरण फोन न. सहित 'साथियों के फोन न. ' पेज पर जरुर पब्लिश करें. यह ब्लॉग सबका समान मंच है. अपने मूल्यवान विचारों से आप हमें अवगत करवा सकते है. reslarajasthan@gmail.com
                                                      आशा करता हूँ कि मेरे सभी सम्मानित साथी आज कि इस गंभीर मुद्दे पर विचार करेंगे. आपके सहयोग कि आशा में, जुड़े और बता दे कि हम अपने अधिकारों के  प्रति जागरूक है,
    संगठित रहें, जागरूक रहें, आगे बढे.
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Resla Raj

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