'पत्र पत्रिका' पृष्ठ

सम्मानित साथियों,
                          एक संगीतज्ञ  के लिए उसके वाध्ययन्त्र ,गायक के लिए सुर, नेता के लिए सिद्धांत,  एक सिपाही के लिए उसकी बंदूक का और मिस्त्री के लिए उसके औजारों का या साहूकार के लिए ब्याज या भोजन में नमक का जितना महत्व है उससे कही अधिक महत्व है अध्यापक के जीवन में कलम व लेखन का. यदि हम आज के दौर पर थोड़ी गौर करे तो पाएंगे कि वर्तमान में हम लेखन से दूर होते जा रहे है. साथियों हर अध्यापक का जीवन अपने आप में एक अनुभवों कि किताब होता है. समाज में, कक्षा में, अलग अलग जगहों पर हम इतनी बातें सीखते है कि यदि हर बात लिखनी पड़े तो एक वृहत कोष बन जाये. बीकानेर के आइ. ए. एस. इ. संस्थान में लिखा है कि 'अध्यापक वही बने जो आजीवन विद्यार्थी बना रह सके. हमारे लिए अध्ययन अपने आप को अद्यतनरखने के लिए बहुत जरुरी है. साथियों बहुत सारी सतरीय व ज्ञानवर्धक  पत्र पत्रिकाएं हमें बड़े आसानी से साथ ही बहुत कम खर्च में आजीवन या वार्षिक रूप में उपलब्ध हो सकती है. आज इस ब्लॉग में हम कुछ ऐसी ही पत्र पत्रिकाओं कि जानकारी 'पत्र पत्रिका' पृष्ठ पर  उपलब्ध करवा रहे है. आशा है आप को लाभ होगा.
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Resla Raj

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