संगठन ही शक्ति है।

वर्तमान समय में सबसे बड़ा प्रशन जो आपके साथ साथ मेरे भी मन में है साथियो वो है ये जानना कि राजस्थान सरकार हमारी समस्याओं  का क्या समाधान करने वाली है। हम आपस में पूछ पूछ कर थक गए है कि  क्या हुआ? हमारा ग्रेड पे मिला  या नहीं, हमारी   हेडमास्टर के समान वेतन वाली समस्या का क्या हुआ ? ऐसे कितने ही प्रशन हम सब साथियों के मन में हैं परन्तु सबसे बड़े दुख का कारण जहाँ तक मैं समझ पाया हूँ वो है हम में एकता का अभाव .वो वर्ग जो पूरी दुनिया को एकता का महत्व समझाता है, बड़े बड़े भाषण देता है, उदाहरण देता है, वही वर्ग आज अलग थलग , जुदा जुदा ,खेमों में बंटा नजर आ रहा है मैंने एक साधारण सा  उद्देश्य रखा है = हमारी एकता। मित्रो  बांटने को तो बहुत कुछ है  पर यदि हम एक हो जाये और जोरदार ढंग से अपनी मांग रखे तो अवश्य ही हमें सफलता मिलेगी 
                                                         आज हम जिस शासन में है वो है लोकतंत्र और लोकतंत्र में बहुमत का महत्व सर्वोपरि होता है . संख्या बल बहुत जरुरी होता है . सही बात करना और कहना जरुरी होता है। ज्ञानी जनों का सम्मान होता है।आज हम व्याख्याताओं के पास किस की कमी है? कुछ प्रशन है  जबाव दो और खुद जान  लो
1. क्या हेडमास्टर संख्या में व्याख्याताओं से अधिक है?
2. हमारे पास अच्छे नेतृतव का अभाव है?
3. क्या हमारी मांगे गलत है ?
4. क्या हम लोग सोये है ?
                                                   लगभग हर प्रशन का उत्तर है नहीं . तो फिर क्यों ऐसा है की हमें अपनी बात मनवाने में  इतना समय लग रहा है। क्यों नहीं हमारी  लोकतान्त्रिक मांगे पूरी हो रही . स्कूल नए खोले जा रहे हैं किन्तु पहले से जो है उनको संभाला नहीं जा रहा है। पूरा स्टाफ नहीं है हमारी कार्य क्षमता व उर्जा  अन्य कार्यों में में लग रही है। हमारा काम है ज्ञान  देना  तथा राष्ट्र निर्माण करना यदि हमें अपनी    उर्जा अपने अधिकारों को   पाने में ही खर्च करनी पड़ेगी तो हम अपना दायित्व कैसे निभा पाएंगे ? ये सरकार  का दायित्व है की अपने सेवा  कर्मियों की सही बात को सुने तथा उनकी कार्य कुशलता बढ़ाये न की ऐसा वातावरण बनाये जो की अब है। साथियों , फेस बुक या अन्य जगहों से थोडा सा समय निकल कर अपनी बात को इस मंच पर रखे . अधिक से अधिक संख्यां में यहाँ आयें और अपने विचारों से सभी को अवगत कराएँ 
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Resla Raj

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