आज की बात

साथियो,
आज सुबह से ही मैं आपसे मुखातिब होना चाह रहा @था लैपटॉप पासनही था पर असीम इच्छा थी आपसे बात करने की तो मोबाईल पर ही प्रयास कर रहा हूँ. साथियो शिक्षक का पद पूरी दुनिया में भगवान से भी बङा माना गया है पर किन्हीं कारणों से आज हम पाते हैं की आज स्थिति गंभीर है समाज में भगवान के प्रति सोच बदली है साथ ही इस भौतिक वाद की दौड़ में जहाँ धन प्रधान है वहाँ व्यक्ति की महत्ता में कमी आई है साथियो आज हर माँ बाप इस अंधी दौड़ में जिसका उन्हें ना प्रारंभ पता है ना अंत बस या तो दौङ रहा है या अपने मासूमौं को दौडा रहा है आज हम शिक्षकों की यह जिम्मेदारी है कि हम उन्हें जीवन मूल्य शिक्षा दें केवल किताबी ज्ञान में पारंगत ना करके उन्हें पहले संस्कारित मानव बनाये
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Resla Raj

Hi. ’Express you views..

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