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सम्मानित प्राध्यापक साथियों, इस पोस्ट के माध्यम से एक तथ्य आपके ध्यान में लाया जा रहा है जिससे न केवल आप में कई लोग अपरिचित है अपितु प्राध्यापको के प्रतिनिधि संगठन रेसला के प्रांतीय अध्यक्ष तथा महामंत्री व अन्य पदाधिकारी भी अनभिज्ञ है कि राजस्थान शिक्षा सेवा नियम 1970 के उपनियम 28 (7) के अनुसार प्रधानाचार्य के पद पर पदोन्नति प्राध्यापक तथा प्रधानाध्यापक मावि पद के कार्मिको की कॉमन सीनीयर से होनी चाहिए। आप कृपया अपने विद्यालय या अन्य किसी जगह से "राजस्थान शिक्षा संहिता भाग-2" लें तथा उसमें राजस्थान शिक्षा सेवा नियम 1970 के उपनियम 28 (7) को पढ़े और समझे। आपको स्पष्ट हो जाएगा कि इस नियम के अनुसार ग्रुप- ' डी ' (प्रधानाचार्य) के पद पर पदोन्नति हेतु ग्रुप- ' ई ' (वरिष्ठ उप जिला शिक्षा अधिकारी व समकक्ष पद) तथा ग्रुप- ' एफ ' (प्रधानाध्यापक मावि एवं व्याख्याता) के पद पर कार्यरत लोगों की उनकी संस्था
ई नियुक्ति तिथि से कॉमन वरिष्ठता सूची बननी चाहिए। इसके अलावा उच्चतम न्यायालय के राजेन्द्र कुमार गोदिका व अन्य विरुद्ध राजस्थान सरकार के कोर्ट केस के अंतर्गत दिए गए निर्णय को भी पढ़े जिसमें इस नियम के अनुसार पदोन्नति करना उचित माना है। जब 1970 से यह नियम अस्तित्व में है तथा प्रधानाचार्य के पद पर पदोन्नति के लिए वर्ष 1970 से लेकर 1988-89 तक की गई डीपीसी इस नियम के अनुसार होती रही है तो फिर इसे राज्य सरकार द्वारा 1988 के बाद में लागू क्यों नहीं किया जा रहा है तथा संविधान की भावना के विपरीत इस नियम का उल्लंघन करके व्याख्याताओं के साथ अन्याय क्यों किया जा रहा है? कृपया इस विषय पर यहाँ तथा अपने कार्यस्थल पर व्यापक विचार विमर्श करें।
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Resla Raj

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